समूह की महिलायें करेंगी टेक्नीशियन का कार्य
सौर ऊर्जा स्टडी लैम्प रिपेयरिंग एवं मेंटेनेन्स हेतु समूह की महिलाओं को तीन दिवसीय प्रशिक्षण होगी
समूह की महिलायें करेंगी टेक्नीशियन का कार्य
मिहींपुरवा, बहराइच: उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं आईआईटी, मुंबई के संयुक्त तत्वावधान में संचालित भारत सरकार की नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत 70 लाख सौर ऊर्जा स्टडी लैंप योजना चला़यी जा रही है।
आई. आई. टी. मुंबई के राज्य परियोजना प्रबन्धक, उत्तर प्रदेश, शैलेन्द्र द्विवेदी के अनुसार यह योजना उत्तर प्रदेश के 29 जनपद एवं 115 ब्लाकों में लागू हुई हैं तथा 34 लाख स्टडी सौर ऊर्जा लैम्प स्कूलों के बच्चों को वितरण किया जाना हैं। अभी तक 1.5 लाख बच्चों को स्टडी सौर लैम्प वितरण हो चुका हैं। प्रथम चरण में जनपद -सोनभद्र, उन्नाव, बहराइच, लखीमपुर खीरी, हरदोई, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर मे योजना चल रही हैं तथा अभी तक 8 जनपद मे आजीविका मिशन की 300 महिलाओं को रोजगार भी मिला है। ये परियोजना उन-उन क्षेत्रों में चलाई जा रही है, जहां पर या तो बिजली का कनेक्शन नहीं है और कनेक्शन है तो या तो बिजली की कटौती होती है या फिर उनसे प्रर्याप्त प्रकाश नहीं मिलता है। जिसके कारण स्कूल जाने वाले बच्चे शाम को किरोसिन दीपक में पढ़ते हैं, जिससे उनके पढ़ने में असुविधा होती है। इसलिए सोलर लाइट परियोजना विशेष रूप में स्कूल के बच्चों के लिए तैयार की गई है। किरोसिन दीपक से शरीर के अंगों जैसे आंखों, फेफड़ों आदि पर दुष्प्रभाव पड़ता है। परंतु सोलर पैनल से हम अपनी रौशनी खुद उत्तपन्न कर सकते हैं और पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होगा।
राजेश कुमार, उपायुक्त स्वरोजगार ने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के इंटेंसिव विकास खंड मिहींपुरवा में दो असेम्बल एवं डिस्ट्रीब्यूशन केंद्र खोले गये हैं। मिहींपुरवा के लिए 55,700 लैंप का लक्ष्य हैं। 1 दिसम्बर,2017 से मिहींपुरवा में दो केंद्र संचालित किये जा रहे हैं। एक केंद्र नारीशक्ति संकुल स्तरीय संघ, सुजौली, जो विकास खंड से 55 किलोमीटर दूर और जंगल से चारो तरफ से घिरा हुआ है, दूसरी सांसद आदर्श ग्राम मटेहिकला, जो तराई क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में रौंशनी देकर यू पी एस आर एल एम और आई आई टी, मुम्बई ने पूज्य बापू की अंत्योदय की संकल्पना को साकार किया है। यह काबिले तारीफ़ हैं। मिहींपुरवा में 49,564 लैंप असेम्बल एवं 46,359 वितरण किया जा चुका है। 216 विद्यालय के बच्चों में वितरण हुआ है। विकासखंड के 411 विद्यालय लैंप वितरण के लिए चिन्हित किए गए हैं।
ब्लॉक एंकर नंदकिशोर साह ने बताया कि शेष लैम्प भी निर्धारित तिथि तक वितरण हो जाने की संभावना है। लेकिन जो भी लैम्प वितरण किये जा चुके हैं उसपर वारण्टी 31 दिसम्बर 2018 है। इस लिहाज से छात्रों को वारण्टी का लाभ मिलता रहे इसी उद्देश्य से जो महिलाएं इस योजना में कार्य कर रही थी उन्हीं में से कार्य आधारित तकनीकी जानकारी की परीक्षा ली जाएगी एवं वर्तमान में कार्यरत 40 में से 20 लोगों का चयन किया जायेगा।, जो तकनीशियन के रूप में रिपेयर एवं मेंटेनेंस केन्द्र खोलकर सुविधा उपलब्ध कराएंगे। इसे विशेष रूप से तकनीकी जानकारी हो इसके लिए तीन दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण 25 से 27 मई 2018 तक संकुल संघ के सभागार में ही होंगे। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण बाद ये महिलाएं अलग अलग क्षेत्रों में तकनीशियन के रूप में पदस्थापित होकर रिपेयर एवं मेंटेनेंस केन्द्र खोलकर वारण्टी वाले लैम्प को दुरुस्त कर बच्चो को लैम्प वापस करेंगे। खुद की जानकारी बढ़ने से अपने आपको एक सफल उद्यमी के रूप में भी स्थापित कर पाएंगे। कार्य सम्पन्न हो जाने के तुरन्त बाद एंड्रॉइड मोबाईल के एप्लीकेशन से रिपोर्ट भरेंगे। यहीं उनके कार्य को प्रमाणिकता होगी। तकनीशियन के रूप में चयनित सभी महिलाएं एंड्रॉइड ले चुकी है। उन्हें एप्लिकेशन में रिपोर्ट भरने के लिए भी सिखाया जाएगा।
अनुराग पटेल, विकास खंड प्रबंधक ने बताया कि प्रत्येक दिन औसतन 200 लैंप बन रहे हैं। महिलाएं अपने कार्य से संतुष्ट एवं खुशहाल है। अपनी क्षमता पर नाज करती हैं। जब भी स्टडी सौर ऊर्जा लैंप खराब होता है तो संस्था द्वारा एक वर्ष निशुल्क रिपेयर किया जाएगा। इस योजना मे लैम्प बनाने वाली समूह की महिला को 12 रू0 प्रति लैम्प एवं वितरण करने वाली को 17 रू0 प्रति लैम्प दिया जाता हैं। जिससे महिलाएं 1 दिन में 500 रू0 तक लगभग आमदनी कर सकती है तथा महिलाएं प्रति माह 5000 रू से 6000 रू कमा लेती है। जब से स्ट्डी सोलर लैंप परियोजना की शुरूआत हुई है अौर इस योजना से सभी छात्र -छात्राओ को स्ट्डी सोलर लैंप पढ़ाई के लिये लैंप मिला हैं, तब से सभी छात्र, छात्राओ के पढ़ाई मे सुधार आया तथा इस लैंप के उपयोग घर के काम में भी किया जा रहा हैं जिससे घर के दैनिक काम भी किये जा रहे है। जिस तरह सभी छात्र, छात्राओं को पढ़ाई का अधिकार मिल रहा हैं उसी तरह आज सभी छात्र-छात्राओ को रौशनी का अधिकार मिल रहा हैं। शिक्षा का स्तर आज के समय से पहले जब गांवो तक बिजली की संचार व्यवस्था की कमी थी और पढ़ाई की कोई समुचित व्यवस्था न होने के कारण यहा पर शिक्षा का आभाव होना स्वाभाविक था। अब समय के साथ बदलाव होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश ही नही बल्कि पूरे देश मे भारत सरकार संयुक्त तत्वावधान मे एक नयी ऊर्जा का संचार किया जो 70 लाख स्टडी सोलर लैम्प योजना के नाम पर बच्चो के लिए शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए तैयार की गई जिससे आज के समय मे बच्चो को शिक्षा का अधिकार और ग्रामीण क्षेत्र की गरीब परिवार की महिलाओ को रोजगार का सुनहरा अवसर प्रदान हुआ समाज हित जो अनोखा कार्य भारत सरकार के द्वारा किया जा रहा है। सौर ऊर्जा कठिन परिश्रम करके उत्तर प्रदेश मे अपनी कार्यशैली से हम सभी लोगो को टीम के साथ काम करने की प्रेरणा दी गई है। इस योजना के द्वारा सौर ऊर्जा से मिलने वाले प्रकाश की एक विशेष प्रकार अनोखी जानकारी भी हासिल हुई है। आज उत्तर प्रदेश के बच्चो को शिक्षा के क्षेत्र मे तो अधिक मजबूत बनाने मे बहुत ही अच्छी कामयाबी दिख रही है और इन गरीब परिवार की महिलाओ को रोजगार का सृजन हो रहा है और समाज मे एक अनोखी पहचान भी मिल रही है।
हम सभी टीम सोल्स उत्तर प्रदेश के इस परियोजना से अति प्रफुल्लित है इससे हम सभी में एक नयी ऊर्जा क्रान्ति का संचार हुआ है।
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